आज की सच्चाई कड़वी है, लेकिन आपको सुननी पड़ेगी।
जिस Divide & Rule की सोच ,नीति, चाल से अंग्रेजों ने इस देश पर बरसों राज किया आज वही तरीका हमारी अपनी "राजनीति" का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है..?
पहले अंग्रेज कहते थे हिंदू बनाम मुस्लिम,ऊँची जाति बनाम नीची जाति, उत्तर बनाम दक्षिण...
आज वही खेल नए नामों से, नये तरीके से खेला जा रहा है..?
कभी आरक्षण के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर,
कभी क्षेत्रवाद के नाम पर तो कभी लव जिहाद, हरा, नीला पिला, काला जिहाद,फल जिहाद फलाना जिहाद टिमका जिहाद ना जाने और कितने जिहाद..?
असल मे जिहाद का मतलब आगर इन से पूछो तो... वंदे मातरम् ओ भी.. अधुरा कच्चा..शकल भी देखने लायक बना ते हैं..! कई बार उजागर हुए भी हैं..!
दोस्तों क्या कहें अब तो उन्होने गौ माता के भी धर्म धुंड लिये बोले "मिथुन" जाहिलियत की भी कुछ हद्द तय सीमा होती है..!
सुना होगा अब तो सत्ता के लालच में पुरुष बनाम महिला तक की लाइन खींच दी।
थोडा गौर से सोचिए क्या देश आगे बढ़ रहा है..?
या आज भी हम बार-बार की तरह उसी जाल में फँस रहे हैं..?
राजनीति का असली मक्सद क्या था..? राजनेताओं का काम क्या था.?
देश के सर्वोत्तम अहम पद पर विराज प्रधानमंत्री का काम देश को जोडे रखना हैं ना…? देश का विकास करना है ना…? देश नाम और देश के लोगोंको हर किस्म से ऊंचा उठाना, चाहें ओ शिक्षा,रक्षा हो या रोजगार अन्न वस्त्र, आर्थिक उन्नती तक जैसे अनेको जरूरी मक्सद कार्य है, हैं ना..? फिर क्या आपको ओ कहीं दिखाई दे रहा है..? क्या आपकी आपके बचोंकी बेरोजगारी कम हुई..? क्या आपको या आपके बच्चोंको नोकरी लगी..? क्या देश में महंगाई दर कम हुई..? या शिक्षा का स्तर उंचाया गया..?
१५/१५लाख छोडो, क्या पक्का मकान मिला..? क्या हवाई चप्पल वाला हवा मे सफर कर रहा है..?
क्या देश मे गरिबी का स्तर घट गया..? सब जुमला था आपके गरीबी का मजाक था, आपके भावनाओंसे खेला गया क्या आपको नहीं लगता आपको ठगा गया..? अब एक बार उंची सांस लो संयम रखो और अब बोलो क्या पिछले लगबग १२वर्ष अधिक समय से इस सरकार से आपके अच्चे दीन आये..?
आगर अंधभक्ती से परे और "अब्दुल को टाईट" करने की काल्पनिक भावना को भूल कर जवाब हां हैं..?
आगर हैं तो लगे रहो बढिया है आप के और आपके बच्चोंके बेहत्तर भविष्य के लिये हमारी और तमाम भारतीयोंकी शुभेच्छा हैं जी..!!
लेकीन श्रीमान आगर आपका जवाब नहीं है,
तो थंडे दिमाग से सोचो आज क्या हो रहा है..? देश किस दिशा में जा रहा है आनेवाले समय में उसकी दशा क्या होगी..? क्या हो सकती है..? सोचना पडेगा क्योंकी देश तुम्हारा , हमारा या तेरा या मेरा नहीं बल्की हम सबका हैं..!!!
बाकी इन 'राज'दारोंको तो जितना ज्यादा समाज बंटेगा, उतना आसान हमपर और देशपर 'राज' करना होगा होते रहेगा।
यही अंग्रेजों का फार्मूला था और क्या आज भी वही चल रहा है..?
सच यह है कि सत्ता नेता बदल गए है,लेकिन खेल वही है, दिख भी रहा है..!!
धूर्त चतुर चलाख राजकारणी हर रोज एक नया तरीका, नये नये फंडे और सबसे आसान भी सबसे सटीक भी ओ हैं "धर्म घोल" ये हमेशा लाते रहेंगे, क्योंकि जब जनता एक हो जाती है,
तो सवाल पूछती है..! और जब जनता बटी होती है.!
तो आपस में लड़ती है और सवाल करना हमेशा के लिये भूल जाती है।
इसलिए हमें यह समझना होगा हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी एकता है, और सबसे बड़ी कमजोरी हमारा आपसी धार्मिक बटवारा हैं।
कहते है,जब तक हम “धर्म” के नाम पर लड़ते रहेंगे, तब तक कोई न कोई दृष्ट हम पर राज करता रहेगा।
आज समय की पुकार है जागरूक बने देश को और अपने धर्म को मजबूर नहीं मजबुत बनाओ,
याद रहे कोई भी धर्म किसी आस्था की अनास्था करने से या किसीका धर्म किसी पर थोंपणेसे नहीं, उसकी सच्ची आस्था ,शिक्षा उसके आचरण से उंचाया जाता है..!!
समय है देश को तरक्की शिखर तक पोहंचाने के लिये पहले अपने धर्म, जाति, क्षेत्र से ऊपर उठकर समजदारी दिखाए.!
हिंदू, मुस्लिम,सीख,इसाई सभी के आस्थाओंका सन्मान करते हुए पहले "इंसान" और फिर देश का सच्चा नागरिक बनने का सफल प्रयास करें।
वरना अनेको उदाहरण हैं “जिस देश का समाज आपस मे खुद बट जाता है, उसे कोई दृष्ट बाहर वाला नहीं तोड़ता, बल्की वो देश खुद ही टूट जाता है।
हिंदू मुस्लिम कर के देश "विश्वगुरु का विकास" तो कर रहा हैं.. लेकीन देश और आपका..?
हर एक जिंदा जान को दुनिया छोडकर जाना ही हैं.! खाली हाथ सिर्फ कर्मा लेकरं साथ..!!!
दोस्तों अब कमेंट बॉक्स मे अंधंभक्ती का चष्मा उतारकर सच्चे दिल से जरूर बताओ हर हर,घर घर, क्या मोदी है तो मुमकीन है..?
धन्यवाद...