मोदी तेरे राज मे क्या हाल हो गया है, देश के मुख्यधारा की प्रवाह कही जानेवाली मीडिया का…?

  • मुख्यसंपादक (Kolhapur)
  • Upadted: 11/04/2026 6:16 PM

दुनिया मे "भारत" देश एक सार्वधर्म सार्वभूमी अमन पसंद, इन्सानियत् पसंद मोहब्बत पसंद देश है..?
   मिडिया का असल मक्सद अपने देश का आईना बनना, देश हित मे जनता की आवाज बनना होता है, जब जब मिडिया सवाल पुछती है तब तब देश और देशका लोकतंत्र मजबुत बनता है, बावजूद आज देश की ज्यादातर मुख्य प्रवाह की मिडिया प्रायव्हेट कॉर्पोरेट कंपनियोंकी मेज चढ चुकीं हैं, यहाँ देश बडा ना जनता, जहाँ सबसे बडा रुपय्या हो गया है..!
लेकीन उन्हे याद राखना ही होगा देश प्रथम होना अनिवार्य है..!
      आज कई मिडिया हाऊस मे नोकर पेशा जो खुद को स्वयं पत्रकार कहलाते हैं, हाल ही मे पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामीजीने बेगईरत दागदारोंको कैसे नोकरी मिलती है उसके कई राज उजागर भी किये है, व्हिडिओ आज कल सोशल मीडिया पे खूब सूर्खियां बटोर रही हैं,
   सच बात कुछ बेगईरत दागदार नोकरोंकी जो आज आए दिन चंद रुपयोकीं खातिर् अपना जमीर बेच टीआरपी के चक्कर मे देश की शान ओ साख दोनो डुबोनेकी होड मे लगीपडी है, मुख्यतः दिखाई भी दे रहा है, उसे अब देश मे गोदी मिडिया कहा जाने लगा हैं,
उससे इनको फर्क भी नहीं पडता "निर्लज्जम सदा सुखी" हैं, 
     देश की गोदी मीडिया दिन-रात खबरों के नाम पर शोर,हिंसा सिर्फ और सिर्फ आपसी नफरत ही नफरत फैलाना आपसी भाईचारा बिगाडना..और.. दुश्मन पडोसी देश तो पडोसी अब तो दुसरे मित्र देशोंके मामलातोंमे भी अपने देशहीत का अजेंडे को भूल प्रोपेगेंडा की राह चल बेझिज्जक एकतरफा झूठ फैलाने में उलझा हुआ है।
    ये तो ऐसें हुआ जैसे अपना घर अशोक खाईरात जैसों के हवाले कर, दूसरों के घर झांकना..
     देश के गोदी मीडियाके इसी जाहिलियत भरे गैर जिम्मेदार रवय्ये से दुनिया मे देश की छबी खराब तो, हो ही रही, बल्की इससे देश के कूटनीतीक संबंधोमेभी बाधाये निर्माण होंगी क्या आज होती दिखाई भी दे रहीं है, और तो और... देश का लोकतंत्र भी कमजोर होने लगा दिखाई दे रहा है.?
   अब तो इन देश के गद्दार गोदी मीडिया की जीवनी जैसे झूठ,नफरत, हिंसा को बढावा देना, सत्ता से चापलुसी कर देश का बेडा गर्क करना ही असल मक्सद बन यही इंनकी दिनचर्या की अदताना फितरत बन गई है, 
गोदी मीडिया के जरिये आएदिन हिंदू-मुस्लिम कर तोड मरोड के आधाअधुरा परोसे जा रहे झूठे इतिहास को और आपसी भाईचारे में फूट डालने वाली झूठी खबरोंको अपनी मनमर्जी से मिर्च मसाला लगा लोगोंके भावनाओंके साथ खिलवाड कर नफरत दिखा कर आपसी भाईचारे को न खतम होनेवाली दुश्मनी मे तब्दील करने मे इने माहिरत हासिल हो रही हैं ..!! 
    तो उधर छूटभैय्ये ट्रॉलर्स सोशल मीडिया पे जागरूक जनता के सवलोंको भद्दी भद्दी गालियों से धमका रही और ये ट्रॉलर व्हॉट्सॲप युनिव्हर्सिटीसे अपने पै पै को जोडते हुए देश के भविष्य को उच्चस्थान ले जानेवाले भोले भाले ज्यादातर युवकों को और कुछ मजदुर जिंनका "सुबह का खाना हुआ तो श्याम का पता नहीं, और आगर श्याम का हुआ तो सुबह का नहीं, उनको उनकी श्रद्धा आस्था की भावना से खिलवाड कर इस अंधभक्तीजडे नशे मे डुबोना चाह रही है जिससे ओ ना परिवार की, ना भविष्य की फिकर करे, और ओ सच छोड हमेशा लाचार असहाय्य सिर्फ एक वोटबँक बनी रहे यही इंनकी मनशा जो देश को कभी ना लौटनेवाले अजरामर नुकसान मे डाल ही नहीं तो धकेल रही हैं...!!
इधर फादर लेंड की नाजायज औलाद निर्दयी बेअक्कल देशद्रोही अंधभक्त कहे होने दो.. क्या फर्क पडता है..!!
   प्राथमिकता से देखा जाए तो गोदी मीडिया के इस प्रोपेगेंडा के जने अंधभक्तीजड रोग का नशा चढे कुछ कुप्रजाती का झुंड सुरु मे कुछ बडे बडे व्हाईट कॉलर चोर ओ छक्के, भगोडे, और पाखंडी, घमंडी, देश और इन्सानियत के दुश्मनो मे दिखाई दिया,
  बाद मे उन्हिके नाजायज वंशज समय के साथ महारोग बन कुछ छूटभैय्ये ट्रॉलर के रूप मे आगे बढा रहे हैं..!!
जिनकी देश मे अंदाजन तादाद कुछ १० से १५ फिसद दिखाई दे थी है,जो हर देश, हर समाज, हर मजहब मे फरेब का चोला पहने पाए भी जाते है..!!
    कभी कभी ये सवाल पडता है ये अपने परिवार- बच्चोंका सामना कैसे करते होंगे.? इन्हे कैसा महसूस होता होगा..? क्या इंनको शर्म आती होगी..? 
  क्या इंनको निंद आती होगी..? क्या इनके सिने मे किसी इन्सानका नहीं वैशीजानवर का दिल है..?
       तानाशाह की याद दिलाते हुए सत्ता के नशे मे चूर मोदी सरकार ने हालहीमे कुछ सोशल मीडिया चॅनल जो सत्ता पक्ष से सीधा सवाल कर रहे थे, जो आज की मोदी सरकार को पसंद नहीं,
    याद रखीये मोदीजी तुम एक आवाज दबाओगे तो दस आवाजे उठेंगी और आगर दस तो और, तो और उठती रहेंगी क्योंकी कोई पत्रकार छोटा या बडा नहीं होता, बल्की अपने पेशे-फर्ज को ईमानदारी से निष्पक्ष और निष्कलंक रखते हुए निडरता पूर्वक जनता के न्याय, हक्क के सवाल उठायें रहता.. जो आज भी बहुसंख्य स्तर पे क्रांतिकार देशभक्त पत्रकार आपनी मशाल को "कितने भी तू कर ले सितम, हस हस के सहेंगे हम, का घोषब्रिद लिये जलाए रक्खे हुए हैं..!!
     बडे बडे मिडिया हाऊस से मिडिया बडा नहीं होता, देश के दर्शकोंसे होता है..! ओ सब देख रहे हैं..! समज रहे है..!!
   उधर पुरे देश का गृहमंत्री होते हुए दोहरा मापदंड दिखा रेवडी पे रेवडी बाटने के जुमले पे जुमला बतीयाय रहा, उपरसे देश के नागरिकोंको हर हर, घर घर एक गाय,एक भैसं दे हर हर,घर घर गोबर.. मुत्र कर रहा..!! 
   और आप भी कुछ कम नाही हो आप तो चुनावी खुले मंचोपर अपने भाषणोंसे देश के गरिमा को तार तार कर संबोधित करते हुए देश के नागरिकोंको हिंदू- मुस्लिम का जहर पिला रहे हैं,     जो किसी देश के प्रधानमंत्री (PM) को नहीं तो हिटलरवादी तानाशाह विचारोंके प्रचार मंत्री (PM) को दर्शाता है..!! देश याद रखेगा जरुर रखेगा...
     वाह मोदी जी वाह..

केंद्र से लेकर, राज्य तक, राजनीती से लेकर, राजकारण तक, न्यायालय से लेकर, प्रशासन तक, चुनाव से लेकर, चुनाव ओयोग तक, फिल्म इंडस्ट्री से लेकर, सेन्सर बोर्ड तक, समशान से लेकर, कब्रस्तान तक, जय श्री राम से लेकर, हे राम तक, नारे तकबीर से लेकर, अल्लाहुआकबर तक, अमेरिका से लेकर इजराईल तक हर चारोओर ब्लॅकमेल और सरेंडर का खेल देश के मुल पारंपारीक "स्वंस्कृती" से हटकर देश की नई "स्वंस्कृती" बनती जा रही है..? 

देश मे पनप रही दोहरे मापदंड वाली मानसिकता "जो आमिर को और आमिर, और "गरीब को और गरीब, बना रही है  जिसे जलद ही रोखने की दिशा मे सरकारसे असल कार्य करने की अत्यावशक जरूरत हैं लेकीन वही असल मे अदृष्य अलिप्त हो रही है..! 
   क्योंकी कुछ विशिष्ट राजनितिक पक्ष को, हाँ वही.. जो केंद्र से लेकर, कई ज्यादा राज्यो मे भी सत्ता मे है.. लेकीन उसे सिर्फ चुनाव जितने की घोर-ओड, लालसा है..!!
   क्या दौर आ गया है…!

    माफ करे मोदीजी आपने अपने गुरूर से मेरे "भारत" देश एक सार्वधर्म सार्वभूमी अमन पसंद, इन्सानियत् पसंद मोहब्बत पसंद देश के गुरूर को ठेच पोहंचाके देश को विश्वगुरु नहीं तो दिशा हिन विश्वशिष्य बनाने की दिशा मे धकेल ने का पूरजोर प्रयास किया दिखाई दे रहा है...!!
   आखरमे बिनती हैं "आगर सच का साथ देने से तकलीफ का डर लगे तो साथ ना दे,   
    मगर किसी स्वार्थ , सुख या लालच के लिये 'देश' विरोधी झूठ को बढावा भी ना दे..,,

देशभक्ति का मतलब डर या ज़बरदस्ती नहीं, बल्कि आपसी भरोसा, भाईचारा, शांति और इंसानियत है। इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और वही किसी भी विश्वगुरू की असली पहचान बनती है।
  सोचे क्या यही "मोदी है तो मुमकीन है!!!"

            हम देखेंगें..!!!!!

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